Wednesday, May 4, 2011

तेरे वादे...

कुछ पूरे कुछ पूरे होके भी आधे,
क्या बताऊ कैसे थे तेरे वादे |
सच्चाई से परे झूट से आगे,
क्या बताऊ कैसे थे तेरे वादे |
वो बैठके सपने दिखाना जागे जागे ,
क्या बताऊ कैसे थे तेरे वादे |
वो कुछ टूटे जुडे हुए से धागे,
क्या बताऊ कैसे थे तेरे वादे |
अपने ना होकर भी  अपना सा बताते,
क्या बताऊ कैसे थे तेरे वादे |
रात भर जगाना और सोना जागे जागे,
क्या बताऊ कैसे थे तेरे वादे|

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