Monday, April 4, 2011

जाओ मेघा...

जाओ मेघा इतना ना बरसो,
दिलाओ ना याद बीते कल परसों,
रोएगा दिल आने वाले बरसो |

पिछले बरस की यादें याद आती हैं, 
दिन रात मुझको सताती हैं, 
अबकी ना कोई भी संग है,
फीका फीका हर एक रंग है |

बूंदे जब भी तन पे गीरे हैं ,
याद पिया की आने लगे है, 
एक एक उनकी वफाएं ,
तेरे आते हे क्यों मुझको सताएं 

देखो अब बस भी करो ना ,
खो चुकी हूँ जिसे भी था खोना,
जाओ मेघा इतना ना बरसो |

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